Central government to implement ‘One Nation, One Ration Card’ scheme soon: Supreme Court
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राशन कार्ड एक ऐसा जरूरी दस्तावेज़ है जिसके कारण गरीब वर्ग का परिवार अपने सम्बंधित राशन की दुकान से गेंहू, चावल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री लेकर अपने परिवार का पालन पोषण कर सकता है. सरकार ने काफी रियायती दामों पर अन्न वितरण की सुविधा दे राखी है ताकि कोई भूखा न रहे. परन्तु देश की आज़ादी के इतने सालों के बाद भी काफी लोगों के राशन कार्ड नहीं बन सके हैं.
कोरोना महामारी के चलते ऐसे गरीब और अप्रवासी मजदूरों को ज्यादा ही डिकटों का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट के वकील रूपक कंसल ने जनहित याचिका दायर कर ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ ONORC योजना तत्काल लागू करने की मांग की है. इस प्रकार वन नेशन वन राशन कार्ड की योजना लागू होने के बाद मजदूरों, कर्मचारियों, छोटे व्यवसायियों आदि को राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार की कई जनकल्याणकारी सुविधाएं एक ही कार्ड के सहारे मिल पाएंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करते हुए केन्द्र सरकार को ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना पर तुरंत अमल में लाने को कहा है. सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि इससे कोरोना संकट के समय विस्थापित मजदूरों और आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग को रियायती खाद्यान्न मिल सकेगा. इस पर सर्वोच्च न्यायलय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना (ONORC) को तत्काल प्रभाव से लागू करने की कितनी संभावना है? दरअसल केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना साल 2020के जून महीने से लागू किए जाने की घोषणा की हुई है.
वकील रूपक कंसल ने याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह विशेष रूप से विस्थापित मजदूरों और आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए ONORC योजना को तत्काल लागू करे जो अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ के समान हकदार हैं. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया था कि केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे सभी व्यक्तियों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य हैं.

