China is an emerging threat to the whole world including India in every field.
विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश के नाम से जाना जाने वाला चीन का नाम अब नए नए आयामों में जुड़ता चला जा रहा है। इसकी सीमा से लगते देशों की संख्या भी विश्व में सर्वाधिक है जो रूस, मंगोलिया, उत्तर कोरिया, वियतनाम, लाओस, म्यान्मार, भारत, भूटान, नेपाल, तिबत देश, अफ़्गानिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और कज़ाख़िस्तान।
भौगोलिक, राजनैतिक और साम्यवादी विचारधारा वाले देश चीन ने पूरी दुनियाँ में तबाही लाने का षड्यंत्र रच लिया है। इसका लगातार ताइवान और होन्ग कोंग को हथियाने की नियति से पूरी दुनियाँ वाक़िफ़ है। इससे पहले इस विस्तारवादी सोच रखने वाले देश ने तिब्बत को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है। अब ये भारत जैसे पंचशील और शांतिप्रिय देश की सीमाओं से भी लगातार विवाद उत्पन्न करता आ रहा है। भारत के 43,180 वर्ग किलोमीटर पर चीन का अवैध कब्जा है। इसके अलावा चीन के नक्शे में 6 देश पूर्वी तुर्किस्तान, तिब्बत, इनर मंगोलिया या दक्षिणी मंगोलिया, ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और मकाउ देखे ही होंगे। ये वो देश हैं, जिन पर चीन ने कब्जा कर रखा है या इन्हें अपना हिस्सा बताता है।
अभी अभी हाल में कोरोना नमक वायरस ने पूरी दुनियाँ में तबाही मचा रखी है। इस वायरस के उन्नत प्रारूप के पीछे भी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने चीन का ही हाथ माना है। चीन के द्वारा युद्ध लड़ने के इस नए तरीके जैविक हथियार से पूरी दुनियाँ में खौफ का माहौल है। इस वायरस ने आम जनजीवन को संकट में डाला ही है साथ में बढ़ती अर्थव्यवस्था को गिरा देने का कुत्सित प्रयास कर दो तरफ़ा मार दी है। अपनी ख़ुफ़िया प्रयोगशालाओं में रासायनिक जैविक हथियारों से लेकर परमाणु हथियारों तक की परिक्षण करवाने वाले से इस शैतान से पूरी दुनियाँ का जन जीवन अस्त व्यस्त हो रहा है।
इस राक्षस ने गरीब और छोटे देशों में भी अपने धूर्त आर्थिक नीतियों के चलते कम ब्याज पर पैसा उधार देने की साज़िश रचता है फिर उसकी सम्प्रभुता पर नज़रें गड़ाता है। उस देश की जमीन और अर्थव्यस्था तक अपने कब्जे में ले लेता है। इसका ताज़ा उदाहरण लाओस,मंगोलिया, मोन्टेनेग्रो, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान, जिबुती, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीव पर चीन ने इतना क़र्ज़ लाद दिया कि श्रीलंका को अपना हम्बनटोटा पोर्ट, पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट और मालदीव को कई भारतीय प्रोजेक्ट्स चीन को सौपना पड़ गया। मोंटेनेग्रो अगर चीन से लिया कर्ज नहीं लौटा पाता है तो वह दिवालिया हो जाएगा और चीन उसकी जमीन पर कब्जा कर सकता है। क़र्ज़ बांटने के अलावा चीन सभी देशों के स्टार्टअप्स में अपना पैसा लगा रहा है ताकि वहां से भी मुनाफावसूली हो।
यहाँ तक तो ठीक था मगर उसकी नज़र यहीं तक नहीं थमी है। पूरी दुनियाँ में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन अग्रणी है उसने सस्ते सामानों की लड़ी लगा दी है जिसकी सर्वाधिक मांग एशिया और अफ्रीका के गरीब देशों में ज्यादा है। वो कपडे, सजावटी सामान, मोबाइल, गैजेट्स स्पोर्ट्स न जाने क्या क्या सस्ती चीज़े उतारता चला जा रहा है और इन देशों से खूब पैसा बटोर रहा है।
पर्यावरण के लिए भी चीन खतरा बनता जा रहा है. चीन का कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन एक दशक से अधिक समय में अपनी सबसे तेज गति से बढ़ा है, जो 2021 की पहली तिमाही में साल-दर-साल 15% बढ़ रहा है। पूरी दुनियाँ में ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्लैशियार टूट रहे हैं पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। वर्षा पीछे हो रही है। वनस्पति नष्ट हो रहे है।
अगर चीन को समय रहते ना रोका गया तो ये पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व पर बहुत बड़ा संकट बनकर उभरेगा और फिर समय बीत जाने के बाद कुछ नहीं सकेगा।