How Taiwan is winning over Corona without lockdown!
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चीन के सबसे पडोसी पूर्वी एशिया के एक देश ताइवान की ने बिना किसी लॉकडाउन के अपने देश में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका. 2.36 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 100 दिन में कोविड-19 के 376 मामले ही सामने आए हैं और 5 लोगों की मौत हुई है. जब हमारा देश लॉकडाउन की तैयारी कर रहा था उस वक़्त तक ताइवान में 24 मार्च तक कोरोना वायरस संक्रमण के 215 मामले सामने आए थे जबकि केवल 02 मौतों की पुष्टि हुई थी.
यहाँ ये बात भी नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती कि चीन में ताइवान के करीब साढ़े आठ लाख लोग काम करते हैं. बहुत मुमकिन ताइवान ख़तरे के निशाने पर था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि चीन के बाद कोरोना से प्रभावित यह दूसरा देश होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ताइवान ने यह सब बिना किसी लॉकडाउन के हासिल किया. 31 दिसंबर को जब चीन के वुहान में कोरोना के विषाणु की ख़बर आई थी तब हमारा देश 24 फरवरी को अहमदाबाद में ट्रंप की रैली (#NamasteTrump) और मध्य प्रदेश की सरकार गिराने जैसे कार्यक्रमों में व्यस्त था और सारी की सारी मीडिया इसको अपने प्रमुख कवरेज में तरजीह दे रही थी.
2003 में ही ताइवान ने भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर बना दिया था. 20 जनवरी को ही ताइवान ने अपने नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर के तहत सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर को सक्रिय कर दिया. सारी सीमाओं को सील कर दिया गया और नियमति प्रेस ब्रीफिंग होने लगी. ताइवान ने चीन से आने वाली उड़ानों को सीमित कर दिया था. चीन से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग होने लगी थी. उन्हें क्वारिंटिन में भेजा जाने लगा था. चीन के फैलाए फेक न्यूज़ से लड़ने के लिए भी सरकार ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंसी की भी मदद ली. 10 फरवरी को जब ताइवान में 16 मामले ही सामने आए थे और चीन में 31000 तभी ताइवान ने चीन से जुड़ी सभी उड़ानें रद्द कर दीं. चीन, हांगकांग और मकाऊ से आने वाले यात्रियों को क्वारींटिन में भेजा जाने लगा. तब से ताइवान में न तो स्कूल बंद हुआ न तो दफ्तर बंद हुए. रेस्त्रां, बार, यूनिवर्सिटी सब खुले हैं.
ताइवान ने डिजिटल मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तमाल करते हुए हर ज़रूरी डेटा को एक दूसरे से जोड़ दिया. बीमा कंपनियों से डेटा लिया गया कि किस किस ने विदेश यात्रा के लिए बीमा कराया है और वीज़ा विभाग से जानकारी ली गई. 18 फरवरी से ही तमाम जानकारियां अस्पताल से लेकर क्लिनिक और दवा दुकानों को दी जाने लगीं. ताकि जो भी मरीज़ जाए उसकी यात्राओं का इतिहास सबको मालूम रहे. ऐसे लोगों के शरीर का तापमान लिया जाने लगा और क्वारिंटिन पर भेजा जाने लगा. चूँकि ताइवान सरकार ने अपने नागरिकों का भरोसा जीत रखा है इसलिए उन्हें अपनी गोपनीय जानकारी भी देश हित में सरकार के साझा करने में कोई हिचक नहीं हुयी. कोरोना से सम्बंधित सूचनाएं लोगों के फोन पर जाने लगे कि किस इलाके में जाना ठीक नहीं रहेगा और आपको इमरजेंसी में क्या करना है. इसके अलावा सरकारी गिडलिनेस तोड़ने वालों पर तीन हज़ार डॉलर जुर्माने का प्रावधान किया गया. ताइवान ने अपने नागरिकों को बचा लिया मगर दुनियाँ को सन्देश दे रहा कि पारदर्शिता, टेक्नॉलजी, बिना तालाबंदी और समय से पहले की गयी तैयारी से हम बहुत कुछ होने से बदल सकते हैं.