It is illegal to install electric barbed wire on agricultural houses, vacant plots and fields.
विद्युत् का उपयोग घरेलु, कृषि यंत्रों और नियंत्रित तरीके से औद्योगिक रूप में ही हो सकता है। इसके अलावा इसका उपयोग किसी भी अन्य प्रकार से गैर कानूनी है। जैसा की आपको ज्ञात ही होगा कि बहुत से कृषक अपने खेतों और कृषि गृह के अलावा खली पड़े भूखंडों को चोरों या छुट्टा जानवरों से सुरक्षा के उद्देश्य से कंटीला तार या बिजली युक्त बाड़ लगा देते हैं, जिससे जाने अनजाने जानवरों या किसी व्यक्ति को घायल हो जाने या मृत्यु हो जाने का खतरा बना रहता है।
देश प्रदेश के कई जिलों में फसल को बचाने और खाली भूखंडों की चोरों या जानवरों से सुरक्षा के लिए लगाई जा रही कटीली और विद्युत्त प्रवाहित तारों से कई बार जानवरों के साथ साथ इंसानो के भी मौत का कारण बन रही हैं। पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 को इस उद्देश्य से अधिनियमित किया था कि जानवरों को अनावश्यक कष्ट के दंड से न गुजरना पड़े। धारा 11 स्पष्ट करती है कि किसी भी जानवर को नुकसान पहुंचाना एक अपराध है और तो और, किसी भी हानिकारक चीज का इंजेक्शन देना और जहरीला खाना परोसना भी गैर-कानूनी है। भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक, किसी भी जानवर को अपाहिज बनाना या चोट पहुंचाना गैर-कानूनी है। गायों पर तेजाब फेंकने, गली के कुत्तों और बिल्लियों को चोट पहुँचाने जैसे कृत्य भी दंड की परिधि में आते हैं. दोषी को कम से कम 2000 रुपए का जुर्माना और/या 5 साल तक के कारावास की सजा दी जाती है।
इसका एक उदाहरण छत्तीसगढ़ से है-
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा नगर पंचायत के गांव फुटगुना खार के एक खेत में फसल को जानवर से बचाने के लिए खेत में लगाए गए कंटीले तार में उतरे करंट की चपेट में आकर एक महिला की मौत उस वक़्त हो गई जब वो वहां शौच के लिए गई थी। मृतका गायत्री पति बहादुर ठाकुर के द्वारा शिकायत करने पर पुलिस ने मामले की जांच में पाया कि खेत मालिक नाथूराम नायक पिता पीलाराम नायक दोषी हैं और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के तहत गैर इरादतन हत्या और विद्युत अधिनियम की धारा के तहत मामला दर्ज किया।
जानिए क्या है गैर इरादतन हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 308