Know why China and Pakistan are happy with Taliban?
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महज २२ दिनों में तालिबान ने बन्दूक की नोक पर अफगानिस्तान की सत्ता हासिल कर ली। इसके पीछे बहुत से कारक हैं। यदि कायदे से विश्लेषण किया जाय तो भारत में राजीनीति के कारण जो विदेशी खासकर पडोसी देशों जैसे पाकिस्तान और चीन के सन्दर्भ में परिदृश्य बदल चुके हैं। ये सभी को मालूम है कि अफगानिस्तान से हमारे देश का राजीनीतिक व्यापारिक ही नहीं ऐतिहासिक संबंद्ध भी रहा है। आज का कंधार पहले का गांधार देश हुआ करता था जो कि अखंड भारत का हिस्सा था। ब्रिटिश काल में जब अखंड भारत को बांटा गया तो सीलोन आज का श्रीलंका, बर्मा आज का म्यांमार, गांधार आज का अफगानिस्तान, तक्षशिला आज का पाकिस्तान, सम्पूर्ण बंगाल आज का बांटा हुआ बांग्लादेश बना।
1947 में जम्मू-कश्मीर के राजा महाराज हरि सिंह के पास दो विकल्प थे – वो या तो अपनी रियासत को भारत में शामिल करें या पाकिस्तान में. ये फैसला देर से करने के कारण पाकिस्तान की तरफ वाले मुस्लिम बहुल आबादी ने महाराज हरि सिंह के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह से निपटने के लिए हरि सिंह ने भारतीय सेना की मदद मांगी, तो भारत ने उन्हें इस शर्त पर कि जम्मू-कश्मीर को भारत के राज्य के तौर शामिल करे तभी मदद मिल सकेगी। अंग्रेज़ों ने जाते वक़्त ऐसी चाल चली कि अपना ही देश दो हिस्सों में बाँटने के बाद आपसे में ही दुश्मन बन गए। कई लड़ाईया लड़ी गयीं, जिसमे कश्मीर को बंटवारे को लेकर काफी विवाद भी रहा है। 1949 के सीज़फायर के बाद से चार प्रान्त पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को पाकिस्तान अपना हिस्सा बताने लगा और इसे पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाने लगा।
5 August 2019, को जब भारत सरकार ने धारा 370 और 35A को हटाया तब से पाकिस्तान के साथ साथ चीन के तेवर भी भारत के लिए बदल गए थे, क्यूंकि आज का POK के रास्ते चीन महत्वकांक्षी योजना China–Pakistan Economic Corridor गुजरती है। यदि भारत सरकार कल अपने अधिकार में POK को ले लेती है तो अरबों डॉलर की योजना धूल में मिल जाएगी साथ ही साथ अफगानिस्तान की सीमा भारत से सट जाएगी। ये बात चीन और पाकिस्तान को नागवारा गुजरी, इसलिए पाकिस्तान की मदद से चीन ने दूसरा रास्ता अपनाया। उसने आतंकवादी संगठन तालिबान और हक़्क़ानी नेटवर्क के चीफ की मदद से अफगानिस्तान को अपना निशाना बनाया। इधर अफगान सेना ने बिना लड़े अपना देश लुटने के लिए आतंकवादियों के हवाले कर दिया। चीन की मदद करने और China–Pakistan Economic Corridor योजना की सुरक्षा के बदले तालिबान चीफ को राष्ट्रपति का पद उपहार में मिला है।
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इस तरह चीन ने अपनी विस्तारवादी सोच के जरिये फिर से भारत को हराने की साज़िश रची है। इस तरह चीन China–Pakistan Economic Corridor के जरिये भारत से POK और अक्साई चीन COK को हमेशा अपने इस्तेमाल के लिए अपने कब्ज़े में रखना चाहता है।