लॉकडाउन : में इन मोबाइल ऍप कंपनियों से कभी न लें लोन, वरना देंगे 3र्ड डिग्री टॉर्चर

लॉकडाउन : में इन मोबाइल ऍप कंपनियों से कभी न लें लोन, वरना देंगे 3र्ड डिग्री टॉर्चर

Never take loan from these mobile app companies in lockdown, otherwise they will give 3rd-degree torture.

#Lockdown2 #OperationHaftaVasooli #RESERVEBANKOFINDIA #FairPracticeCode

लॉकडाउन के चलते या कभी भी कोई समस्या उत्पन्न होने पर आजकल तुरंत Cash पाने का एक जरिया बन गया है और वो है कोई भी क्रेडिट मोबाइल ऍप डाउनलोड करो, अपना आधार कार्ड और पैन कार्ड अपलोड करो कुछ जरूरी इनफार्मेशन की परमिशन दो और झट से आपके अकाउंट में पैसे। मगर आपको नहीं मालूम कि ये आपके लिए भविष्य में कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

भारत में काफी बड़ा तबका ऐसा है जो बैंक से आसानी से लोन नहीं लें पाता, इसी बात का फायदा उठाकर कुछ प्राइवेट कंपनियां मोबाइल ऍप के जरिये सिर्फ आधार कार्ड और पैन कार्ड के द्वारा 5 से 10 मिनट में लोन उपलब्ध करा रही है। मगर ये इनकी सिर्फ जालसाज़ी है। ऍप डाउनलोड करने के बाद आपसे कई तरह से परमिशन मांगी जाती है मसलन आपका मीडिया गैलरी, आपका कांटेक्ट लिस्ट, आपका जीपीएस लोकेशन इत्यादि. जिसका उपयोग भविष्य में आपके किश्त न चूका पाने की सूरत में किया जाता है।

पहले तो प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लोन अमाउंट का 2-3% पहले काट लेती हैं, फिर इनकी उच्चतम ब्याज दर जो कि 24-48% तक हो सकती है उसको चुकाना होता है। ये लोग वो लोग होते हैं जो किसी मज़बूरी के चलते ही इन जैसी कंपनियों के आगे हाथ फैलते हैं।

कुछ ऐसी कंपनियों की लिस्ट तैयार की गयी है एक नज़र डालिये –

No.1 – #HomeCreditIndia (2.4 – 3.3% per month)
No.2.- #MoneyTap (1.08-2.03% per month)
No.3 – #PaySense (1.08 – 2.33% per month)
No.4 – #Dhani (1 – 3.17 % per month)
No.5 – #IndiaLends (0.9 – 3 % per month)
No.6 – #KreditBee (2 – 3% per month)
No.7 – #NIRA (1.5 – 2.5% per month)
No.8 – #CashE (1.75-3.03% per month)
No.9 – #CapitalFirstLimited (Now Become Bank) (1.16 – 1.33% per month)
No.10- #Credy (1 – 1.5% per month)
No.11 – #EarlySalary (2 – 2.5% per month)
No.12 – #SmartCoin (2.5 – 3% per month)
No.13 – #LazyPay (1.25 – 2.6% per month)
No.14 – #AnyTimeLoans (1.5 – 4.5% per month)
No.15 – #mPokket (3.5 -5.13% per month)
No.16 – #Flexsalary (1.25-3% per month)
No.17 – #RupeeLend (3 – 30% per month)
No.18 – #PayMeIndia (2 – 6% per month)
No.19 – #Upwards (1.5 – 2.6% per month)
No. 20 – #StashFin (1 – 5% per month)
No. 21 – #MoneyView (1.33 – 2% per month)
No. 22 – #OCASH (8% to 30%.)
No. 23 – #Cashbean (2.5% to 3.5%)
No. 24 – #Kishht (9% to 33%)
और ऐसी न जाने और कितनी कम्पनिया है जिनका कोई अता पता नहीं है।

किश्तों की समय से अदायगी न कर पाने की सूरत में इनके रिकवरी एजेंट आपकी कांटेक्ट लिस्ट नंबर निकाल कर आपके जान-पहचान वालों, रिश्तेदारों और मित्रों को परेशान करते है। भद्दी गलियों से बात की जाती है, मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। जब इससे भी बात न बने तो फ़र्ज़ी स्टाम्प पेपर्स पर रिकवरी नोटिस भेजी जाती है, आपके सिबिल स्कोर को ख़राब करने की धमकी देते हैं, क्रिमिनल केस करने की धमकी दी जाती है. पुलिस को भेजने की धमकी दी जाती है, कोर्ट में मुकदद्मा चलाने की धमकी दी जाती है. जैसे आप कोई भगोड़े अपराधी हों !

इन जैसी कंपनियों की वजह से ही भारत में आम लोग अपनी कमाई नहीं बढ़ा पा रहे हैं, पहले तो आसानी से लोन लेने के लिए लालच देते हैं फिर जब कोई आम आदमी किसी मजबूरी के चलते इनके जाल में फंस जाता है तो हर महीने 24 से 48 प्रतिशत तक ब्याज वसूलते हैं। मोटे ब्याज और कर्ज के तले उस मजबूर आदमी की कमर टूट जाती है।

क्या करना है आपको?
1- सबसे पहले उस कंपनी को ईमेल के जरिये शिकायत कीजिये, ताकि आपके पास रिकॉर्ड रहे।
2. 15 दिन का समय बीत जाने पर बैंकिंग ओम्बड्समैन को ईमेल (https://www.rbi.org.in/Scripts/AboutUsDisplay.aspx?pg=BankingOmbudsmen.htm) के जरिये उस कंपनी को की गयी शिकायत का व्योरा दीजिये।
3. अगर वहां से भी कोई उत्तर न मिले या संतोषजनक कार्यवाही न हो तो आप सारा ब्यौरा रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (https://cms.rbi.org.in/cms/IndexPage.aspx?aspxerrorpath=/cms/cms/indexpage.aspx) को प्रस्तुत कीजिये।
4. यदि आपको रिकवरी एजेंट्स परेशान करते हैं तो लोकल पुलिस स्टेशन में जाकर सभी बातचीत का रिकॉर्ड या मैसेज को प्रस्तुत कर मानसिक प्रताड़ना का केस Civil and Consumer Courts में कर सकते हैं- जिसमे आप मानहानि, आपका सिबिल स्कोर ख़राब करने की धमकी, गलत जानकारी, फ़र्ज़ी स्टाम्प पेपर्स के जरिये आपको बहकाना, अमानत में खयानत, अनाधिकार या अनधिकृत तरीके से आपके घर में रिकवरी एजेंट्स का घुसना, पैसे चुकाने के लिए धमकी देना, यहाँ तक जबरन वसूली के लिए जान से या अंग भांग करने की धमकी देना, इनसे सम्बंधित धाराओं में वीडियो/ऑडियो सबूतों के आधार पर केस कर सकते हैं।

देश की अर्थव्यवस्था में कमजोरी के लिए ये कंपनियां बहुत जिम्मेवार हैं क्यूंकि इन जैसी कंपनियों के कारण ही बैंक डिफाल्टरों की संख्या बढ़ती जा रही है।

 

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