सस्ते चीनी उत्पादों को ठेलकर, भारतीय सीमा में अतिक्रमण करके अब लद्दाख क्षेत्र से यूरेनियम और सोने पर नज़र

सस्ते चीनी उत्पादों को ठेलकर, भारतीय सीमा में अतिक्रमण करके अब लद्दाख क्षेत्र से यूरेनियम और सोने पर नज़र

Sighting uranium and gold from the Laddakh region by selling cheap Chinese products, encroaching into the Indian border.

#IndiaChinaDispute #Laddakh #ChinaEncroaching

चीन की आर्थिक सेंधमारी के बाद अब उसकी नज़र भारत की भौगोलिक सेंधमारी पर है। जैसा की आप सभी को मालूम है कि चीन वर्षों से भारत में सस्ते सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, मोबाइल फ़ोन/टीवी, कपडे/जूते का व्यापार करता आया है और तो और उसने चीनी ऍप्स, भारत में सस्ते कर्ज देने वाली कम्पनियाँ और शेयर मार्केट में ताबड़तोड़ निवेश के जरिये भी भारत में आर्थिक सेंधमारी कर रहा है।

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इन सबके इतर अब चीन ने भारत की भौगोलिक स्थिति में भी सेंधमारी की शुरुवात कर दी है, चाहे वो सिक्किम का नकूला और डोखलाम हो या लद्दाख में घुसपैठी। इसके अलावा उसने भारत के पड़ोसी और मित्र देश नेपाल के कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को बरगलाकर भारत-नेपाल सीमा पर लिपुलेख मुद्दा गरमा दिया है।

चीन की सरकारी मीडिया शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने चीनी राष्ट्रपति के हवाले से कहा कि – “राष्ट्रीय संप्रभुता की पूरी तरह से रक्षा और देश की समग्र सामरिक स्थिरता की रक्षा के लिए सैनिकों की ट्रेनिंग को व्यापक रूप से मजबूत करना और युद्ध के लिए तैयार करना महत्वपूर्ण है।” इस समय अमेरिका के साथ चीन के रिश्ते चरम तनाव पर हैं, इधर भारत के साथ लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद बना हुआ है। वहीं एक और बार चीन में स्थानीय स्तर पर बलपूर्वक ताइवान को अपने देश में मिलाने के संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों की आवाज को दबाने के लिए नए और विवादास्पद कानून को लागू किये जाने का भी संकेत मिल रहा है।

चीन को यूँ ही नहीं लद्दाख में सीमा विवाद को गर्म कर रहा है, इसके पीछे काफी उद्देश्य है जिसको निम्न कारणों से समझा जा सकता है-
1. भारत ने जम्मू कश्मीर से चीन से मिलने वाली फंडिंग से पाकिस्तान परस्त आतंकवादियों ख़त्म कर दिया है और POK को हासिल करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। POK में गिलगिट-बाल्टिस्तान सहित एक बड़े हिस्से का नियंत्रण काफी हद तक चीनी अधिकारियों के हाथों में हैं। पाकिस्तान ने PoK का अहम हिस्सा ‘अक्साई चीन’ अवैध रुप से चीन को सौंप रखा है। सामरिक महत्त्व के चलते चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के जरिए पेट्रोलियम हासिल करने की योजना बना रहा है।
2. चीन का पश्चिम राजमार्ग ‘ल्हासा-काशगर या शिनजियांग राजमार्ग’ हैं, जो कि आगे जाकर सिल्क रुट कहे जाने वाले काराकोरम राजमार्ग से मिलता हैं। ये इलाका इसलिए भी बहुत अहम है क्योंकि यहां 250 किलोमीटर के दायरे में चीन, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत जैसे 5 देशों की सीमाएं मिलती हैं। और इस मार्ग से होकर ही चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना CPEC (China–Pakistan Economic Corridor) या OBOR (One Belt One Road) इन देशों से गुजरती है।
3..भारत ने पिछले दिनों चीन से जुड़ी लद्दाख और अरुणाचल की सीमा पर तेजी से बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन ने सड़कें बनानी शुरु कर दी हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सेना ने अपनी ताकत मजबूत कर ली है, जिससे चीन बौखलाया हुआ है।
4. लद्दाख की पहाड़ियों में यूरेनियम और सोने का विशाल भंडार है। लद्दाख के पर्वतों में यूरेनियम, ग्रेनाइट, सोने और रेअर अर्थ जैसी बहुमूल्‍य धातुएं भरी पड़ी हैं। चीन की सेना ने लद्दाख के जिस गैलवान इलाके के पास अपने टेंट गाड़ रखे हैं, उसके ठीक बगल में स्थित गोगरा पोस्‍ट के पास ‘गोल्‍डेन माउंटेन’ है। यहां सोने समेत कई बहुमूल्‍य धातुएं छिपी हुई हैं। लद्दाख के कई इलाकों में उच्‍च गुणवत्‍ता वाले यूरेनियम के भंडार मिले हैं।
5. पूरे चीन को उम्मीद है कि शी जिनपिंग चीन को दुनिया के शिखर पर लेकर जाएंगे, इसके लिए चीन की पोलित ब्यूरो ने शी जिनपिंग को असीमित अधिकारों के साथ आजीवन राष्ट्रपति बने रहने का अधिकार दिया है। POK में चीन की कंपनियों द्वारा भारी निवेश के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की साख भी दांव पर लगी हुई है। लद्दाख, सिक्किम, अरुणचल प्रदेश, CPEC, OBOR, ताइवान, होन्ग-कोंग, अमेरिका के मुद्दों से पीछे हटना अब शी जिनपिंग की नाक का सवाल बन चुका है।
6..कोरोना संक्रमण फैलने का दोषी पूरी दुनिया चीन को मान रही है जिस कारण दुनिया भर की कंपनियां चीन छोड़कर भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाना चाहती हैं। चीन इसे अपने अस्तित्व के संकट के तौर पर देख रहा है।

कुल मिलकर स्थिति ये है कि चीन अब संक्रमणकारी हो चुका है, जिसके उपचार के लिए जल्द से जल्द पूरी दुनियाँ में शांति व्यवस्था के लिए कटिबद्ध देशों को एकजुट होकर चीन के इन कुत्सित इरादों का मुँहतोतोड़ जवाब देना जरूरी हो गया है।

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