Telecom companies are robbing you and you do not even know.
कॉल ड्रॉप –टेलीकॉम कंपनियां खास टेक्नोलॉजी आरएलटी (रेडियो-लिंक टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल कर ग्राहकों और सरकार को बेवकूफ बना रही हैं। इस टेक्नोलॉजी के जरिए कॉल ड्रॉप होने पर भी आपकी कॉल तब तक कनेक्ट दिखायी देती है, जब तक कि आप इसे खुद ही न काट दें, इसलिए बात हो या न हो आपको पूरे १ मिनट के कॉल का चार्ज तो देना ही पड़ेगा।
साल के 13 महीने का रिचार्ज – चौंकिए नहीं साल में सिर्फ 12 ही महीने होते हैं मगर इन टेलीकॉम कंपनियों की चालाकी देखिये जब भी आप 1 महीने का रिचार्ज पैक लेते हैं तो वो सिर्फ 24 से28 दिनों तक ही वैध होता है जबकि यही पैक पहले 30 दिनों तक वैध हुआ करता था। अब यही 2 से 6 दिन बचाकर साल के अंत तक ये अपने लिए पूरा एक 28 दिनों का महीना तैयार कर लेते है और इन्ही अतिरिक्त दिनों में करोडो का खेल हो जाता है। उदाहरण के लिए अगर आप पहले 49 रुपये का रिचार्ज 30 दिनों की वैधता वाला लेते तो केवल साल भर में सिर्फ 588.00 रूपये खर्च करने होते मगर अब 28 दिनों की वैधता के चलते आपको 637.00 रूपये खर्च करने होते हैं यानी सीधा सीधा आपका 49 रूपये का आपको घाटा।
बेवजह डाटा पैक मजबूरी – भारत में आज भी करोडो उपयोगकर्ता ऐसे हैं जो आज भी सिर्फ फीचर फोन ही इस्तेमाल कर पाते हैं साथ ही बड़ी मजबूरी में सबसे कम वाला रिचार्ज करवा पाते हैं। घर में केवल एक ऐसा फोन होता है जिससे सबकी बात सब जगह हो सके बाकि के फोन केवल इनकमिंग रिसीव करने के लिए ही रखे जाते हैं। कुछ बुजुर्ग लोग केवल बात सुन सके इसलिए अपना काम फीचर फोन से ही चला लेते हैं जो कि मात्र 49 रुपये से रिचार्ज हो जाता है और 28 दिनों के लिए निश्चिन्त होकर अपना फोन चालू रखते हैं। मगर आजकल जो भी रिचार्ज पैक आ रहे हैं वो सब डाटा पैक के साथ आ रहे हैं जिनकी शुरूआती कीमत ही 129.00 Rs से लेकर है साथ ही साथ अभी हाल में कई कंपनियों ने 49.00 Rs वाला रिचार्ज बंद करने कि घोषणा कर दी है। अब ऐसे में मजबूरीवश फोन इस्तेमाल करने वाले के हाथ से ये सुविधा भी छूट जाने वाली है।

