सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर WHO के लॉकडाउन प्रोटोकॉल को लेकर वायरल हो रहे मेसेज का सच

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर WHO के लॉकडाउन प्रोटोकॉल को लेकर वायरल हो रहे मेसेज का सच


The truth of the message going viral on WHO’s lockdown protocol on social media and WhatsApp.

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कोरोना वायरस संक्रमण से पूरी दुनिया तबाह होती जा रही है। वहीँ भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमित मामलों में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। इस समय भारत में सरकारी अंकों के मुताबिक
4298 संक्रमित व्यक्ति हैं, जो कि लगातार 4थे दिन लगभग् 350% से भी ज्यादा हैं. संक्रमण के इस व्यापक असर को देखते हुए भारत सरकार ने 24 मार्च से 14 अप्रैल 2020 तक लॉकडाउन कि घोषणा की थी, परन्तु अब सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर इस महामारी को लेकर तमाम तरह के फेक मेसेज भी वायरल हो रहे हैं।

WhatsApp, Facebook, Twitter पर इन दिनों एक मेसेज खूब वायरल हो रहा है। इस मेसेज में लिखा गया है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने दुनिया के सबसे खतरनाक वायरस को कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन पीरियड्स के प्रोटोकॉल और तरीके बताए हैं और भारतीय सरकार इसके अनुसार ही लॉकडाउन घोषित कर रही है। भारत में 22 मार्च को एक दिन का लॉकडाउन घोषित किया गया था और इसके बाद 24 मार्च की रात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश के दौरान देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी।

इस वायरल मेसेज में दावा किया गया है कि WHO के प्रोटोकॉल और तरीके के मुताबिक खतरनाक वायरस को कंट्रोल करने के लिए पहले एक दिन का लॉकडाउन, फिर 21 दिन का लॉकडाउन फिर पांच दिन के ब्रेक के बाद 28 दिन का लॉकडाउन, फिर पांच दिन के ब्रेक के बाद चौथे चरण में 15 दिन का लॉकडाउन किया जाए। इस हिसाब से मेसेज में दावा किया गया कि 15 अप्रैल से 19 अप्रैल के बीच लॉकडाउन खत्म कर फिर 20 अप्रैल से 18 मई तक लॉकडाउन किया जाएगा। फिर पांच दिन 19-24 मई के ब्रेक के बाद पांचवे और अंतिम चरण में 15 दिन का लॉकडाउन जो किया जाएगा जो कि 25 मई से 10 जून 2020 तक चलेगा।

सोशल मीडिया में लगातार वायरल हो रहे इस न्यूज़ को देखते हुए डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया गया है। इस ट्वीट में कहा गया है- “सोशल मीडिया पर डब्ल्यूएचओ के लॉकडाउन के प्रोटोकॉल को लेकर जो मेसेज लगातार शेयर किए जा रहे हैं, वो निराधार और झूठे हैं। लॉकडाउन को लेकर डब्ल्यूएचओ का कोई प्रोटोकॉल या तरीका नहीं है।” इस ट्वीट में भारतीय स्वास्थ मंत्रालय, पीआईबी इंडिया और यूएन इंडिया के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट को टैग किया गया है।

सच-झूठ