चीनी वायरस के जरिये एक बहुत बड़ा बाजार खड़ा करने की साज़िश तो नहीं, जैसे अमेरिका ने किया था..

चीनी वायरस के जरिये एक बहुत बड़ा बाजार खड़ा करने की साज़िश तो नहीं, जैसे अमेरिका ने किया था..

There is any conspiracy to create a huge market through Chinese virus, as America did ..

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आज पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। 23,31,099 से ज्यादा संक्रमित और 1,60,952 से ज्यादा मौतें अब तक हो चुकी हैं। COVID-19 को कोरोना परिवार का ये अब तक सबसे खतरनाक सदस्य माना गया है। कई देशों का खासकर अमेरिका का ऐसा मत है कि इस वायरस को जानबूझकर चीनी लैब में बनाया गया है ताकि चीन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर सके और पूरी दुनिया को अपने आगे घुटनो के बल कर दे। दरअसल कई देश चीन की इस मंशा को समझ चुके है कि चीन ऐसा क्यों करना चाहता है। वो जान चुके हैं कि चीन पूरी दुनियाँ की सत्ता की चाभी अपने पास रखना चाहता है। इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि जब पूरी दुनियाँ के लगभग सारे देश में तालाबंदी है उस दौर में चीन अपने कारखाने 24 घंटे चला रहा है। उसे मालूम है कि ये देश ये चीज़े अपने यहाँ अभी बना सकने की स्थिति में नहीं है तो जाहिर सी बात है वो सब चीन की तरफ अपना रुख करेंगे और हुआ भी यही। चीन अपने यहाँ मास्क, Sanitizer,  वेंटिलेटर, व अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण बेहिसाब बना रहा है। अभी हाल ही में स्पेन, अमेरिका और भारत से काफी बड़े बड़े आर्डर भी मिले है।

चाइनीज़ वायरस के तार कहीं 2009 में अमेरिका से फैले स्वाइन फ्लू से तो नहीं जुड़े?-

अगर किसी दवा कंपनी को अपनी दवाई बेचनी हो तो सबसे पहले उसका मर्ज़ होना चाहिए नहीं तो उसकी दवा बिकेगी क्यों ? उसके लिया अच्छा बाजार होना चाहिए और डर से बढ़िया कोई बाजार हो ही नहीं सकता। इसका सबसे अच्छा उदाहरण आपको 2009-2010 में फैली महामारी स्वाइन फ्लू से मिल जायेगा. आपने गौर किया होगा 2009 में अमेरिका से एक महामारी ने लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था जिसका नाम था H1N1 जिसको हम आम तौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जानते हैं।
स्वाइन फ्लू, एवियन फ्लू, बर्ड फ्लू और सार्स इन सबके वैक्सीन भी बन गए।

जैसे अमेरिका में पैदा हुआ स्वाइन फ्लू फिर उसका इलाज़ TAMIFLU वैसे चीन में जन्मा कोरोना वायरस और अब दुनियाँ को बंटेगा इलाज-

अमेरिका की एक कम्पनी Gilead Sciences, Inc. ने कुछ प्रयोगों में सूअर का इस्तेमाल किया गया, जिसका पता 1918 के फ्लू महामारी के दौरान चला था। सूअर का H1N1 प्रकार का फ्लू वर्ष 1918 के फ्लू महामारी के वंश क्रम का ही है। 1997-1998 में, H3N2 जातियाँ उभरी। H1N1 और H3N2 के वर्गीकरण से H1N2 उत्पन्न हुआ। वर्ष 1999 में कनाडा में H4N6 जातियां पक्षियों की सीमा से पार होकर सुअरों की सीमा में चली गयी जो एक ही प्रकार में निहित थीं। हालाँकि H1N1 प्रकार का फ्लू सूअरों से मनुष्यों में इसका सीधा प्रसारण नहीं होता पर वर्ष 2005 के बाद से अमेरिका में केवल 12 मामले दिखाई दिए। बहरहाल, सूअरों में दिखाई देने वाले इस इन्फ्लूएंजा के लक्षण और बाद में मानव आबादी से गायब हो गए जहाँ ये इन्फ्लूएंजा वायरस हो सकते थे, बाद में जब मानव की रोग क्षमता कम हो गयी तो इंसानो में फिर से इस संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लग गए। एक तरह से ये कहा जा सकता है कि स्वाइन फ्लू का जन्मदाता देश अमेरिका ही है।

फिर उस अमेरिकी कंपनी Gilead Sciences, Inc. को ये सारा इतिहास मालूम चल चुका था, उसने स्वाइन फ्लू के लिए एक दवाई TAMIFLU™ (oseltamivir phosphate) का निर्माण उस वक़्त नहीं किया जब तक पूरी दुनिया में इस संक्रमण ने अपना रौद्र रूप धारण नहीं कर लिया। क्यूंकि मेडिकल साइंस में बिज़नेस तब होता है जब उसमे डर शामिल हो,  जितना बढ़िया खौफ का माहौल उतना अच्छा बिज़नेस और उतना अच्छा मोटा पैसा।

अब भारत को भी कमर कसने पड़ेगी ऐसे देशों से जो दोस्ती का ढोंग कर रहे हैं – उनसे दूर रहने का। पहले तो ये किसी भयानक रिसर्च को अंजाम देते है फिर उसका इलाज़ भी देते है ताकि मोटा मुनाफा कमाया जा सके. देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाली रणनीतियों से सतर्क रहना आवश्यक हो गया है।

 

 

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