ये गलतियां बच्चों को बना देती है दिमागी रूप से कमजोर

ये गलतियां बच्चों को बना देती है दिमागी रूप से कमजोर

These mistakes make children mentally weak.

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आमतौर पर बच्चे शुरुआती दिनों में सबसे ज्यादा समय मां-बाप के साथ गुजारते हैं। इसलिए उनके मन, मस्तिष्क, स्वभाव और व्यवहार पर सबसे ज्यादा असर भी मां-बाप का ही पड़ता है। लेकिन कई बार अंजाने में मां-बाप कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे बच्चों का मस्तिष्क कमजोर होता जाता है और उन्हें जीवन में आगे कई तरह की चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आइए आपको बताते हैं क्यां हैं वे गलतियां।

1. बच्चों की हर ज़िद को पूरा करना- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जिन बच्चों की बचपन से हर तरह की इच्छा पूरी की जाती है, उनका व्यवहारिक विकास अच्छी तरह नहीं हो पाता है। व्यवहारिक विकास की हम सभी के जीवन में बड़ी भूमिका है। कुछ मौकों पर मां-बाप के द्वारा बच्चों की इच्छा को ठुकराना और उन्हें गलत-सही समझाना उनके जीवन में अनुशासन लाता है।

2. बच्चों को समय न देना- अगर मां-बाप इतने बिजी रहते हैं कि बच्चों को भी समय नहीं दे सकते हैं, तो इससे भी बच्चे के मानसिक विकास और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है। बच्चों को बिल्कुल आजाद कर देना और बिल्कुल नजर न रखने से बच्चे अपने मन की तो करते ही हैं, साथ ही कई बार कुछ गलत करने पर मां-बाप से छिपाते और झूठ भी बोलते हैं।

3. बच्चों को बहुत अधिक बंधनों में रखना- कुछ मां-बाप बच्चों के बिगड़ने के डर से उन्हें बचपन से ही बहुत अधिक बंधन में रखते हैं। बच्चों पर थोड़ा-बहुत अंकुश जरूरी है क्योंकि उनका मन चंचल होता है और उन्हें अपने सही-गलत की समझ नहीं होती है, लेकिन बहुत अधिक बंधनों में रखने से बच्चे का मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है।

4. बच्चों को मारना और डांटना- कुछ मां-बाप बच्चों को सुधारने के लिए मानसिक और शारीरिक हिंसा को ही सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। बच्चों को मारने और डांटने से उनके डिप्रेशन में जाने, विरोधी मानसिकता के पनपने और मां-बाप के प्रति गलत नजरिया बनने की स्थितियां हो सकती हैं।

5. बच्चों से बहुत अधिक उम्मीद करना- हर मां-बाप की अपने बच्चे से कुछ न कुछ उम्मीदें होती हैं। कई बार बच्चे उन उम्मीदों पर खरा उतरते हैं, तो कई बार वो उम्मीदें पूरी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में अगर मां-बाप बच्चों पर किसी खास काम के लिए लगातार मानसिक दबाव बनाएं, तो ये भी एक तरह की मानसिक प्रताड़ना ही है।

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