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विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में बाँधी काली पट्टी

Vidyut Karmchari Sanyukt Sangharsh Samiti Uttar Pradesh tied black strip against privatization.

#UttarPradesh #AgainstPrivatization

विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में विद्युत अधिनियम संशोधन बिल 2020 मे प्रस्तावित उपभोक्ता, कार्मिक तथा जनविरोधी प्रावधानों के विरोध मे देश भर के 15 लाख विद्युत इंजीनियरों, अवर अभियंताओं एवं कर्मचारियों के साथ जनपद अयोध्या के अंतर्गत सभी उपकेंद्रों एवं कार्यालयों पर अपराहन मे अपने अपने कार्य स्थलों पर उपस्थित रहते हुए समस्त अभियंताओं अवर अभियंताओं एवं कार्मिकों द्वारा काला फीता बांधकर सांकेतिक रूप से विरोध दर्ज कराई गई। इसी क्रम में रूदौली क्षेत्र के विधुत कर्मचारियों ने सोमवार को कार्यालय अधिशासी अभियंता विधुत वितरण खण्ड रूदौली पर काला फीता बांध काला दिवस के रूप में मनाया।

विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के द्वारा विरोध के कुछ बिंदु इस प्रकार रहे-

1- केंद्र सरकार द्वारा बिजली बिलों में सब्सिडी एवं क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने से किसानों, गरीबों तथा समस्त घरेलू उपभोक्ताओं के बिलों में बेतहाशा वृद्धि 2 से 5 गुने तक होना निश्चित है तथा बिल के अनुसार यह प्रावधान कि राज्यों द्वारा निजी उत्पादन इकाइयों का भुगतान नहीं होने पर ग्रिड्स/केंद्रीय उत्पादन इकाइयों से राज्यों की सप्लाई रोकना राज्य के उपभोक्ताओं और निवासियों के हितों के विरुद्ध है।
2- बिजली जिसमें कि राज्य तथा केंद्र दोनों के अधिकार समान हैं उसमें केंद्र द्वारा एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (राज्यों के नियामक आयोग के महत्त्व को समाप्त करते हुए)के गठन के माध्यम से राज्यों के अधिकार का हनन करते हुए अपना एकाधिकार चाहता है जिससे राज्य सरकारें चाह कर भी उपभोक्ताओं को कोई राहत/नियंत्रण नहीं दे सकेंगे।
3- ऊर्जा/वितरण क्षेत्र में फ्रेंचाइजी सिस्टम जोकि उड़ीसा बिहार महाराष्ट्र जैसे राज्यों के कई शहरों में पूर्णता विफल हो जाने के कारण पुनः सरकारों को फ्रेंचाइजी करार निरस्त करने पड़े और बिजली वितरण स्वयं अपने नियंत्रण में लेना पड़ा परंतु एक बार फिर से पूरे देश के स्तर पर फ्रेंचाइजी सिस्टम का प्रयोग केवल कुछ करीबी औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए ही करने का प्रयास किया जा रहा है।
4- इस बिल के माध्यम से सरकार घाटे का राष्ट्रीयकरण और मुनाफे का निजीकरण करने के रास्ते की और आगे बढ़ रही है।

भारत जैसे विकासशील देश में जहां प्रति व्यक्ति आय दुनिया के सबसे पिछड़े देशों में है वहां बिजली जैसी मूलभूत सुविधा वाले संसाधनों का लाभ कमाने के उद्देश्य बाजारीकरण और व्यवसायीकरण करना किसी भी प्रकार से देश हित/जनहित में नहीं है। इस विरोध सभा में अधिशासी अभियंता D. P Singh,उपखण्ड अधिकारी R. K. Singh,अवर अभियंता श्रावण कुमार, विकास पाल ,विकास अर्या, कार्यालय सहायक राजेश श्रीवास्तव, इरशाद अली, हसीब, परमहंस ओझा आदि लोग मौजूद रहे।

Reported by – अब्दुल जब्बार (एड्वोकेट)

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