#Dominions_of_England
What! We are living in a free nation not a Dominion State?
14 अगस्त 1947 की रात को पंडित जवाहर लाल नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में Agreement of Transfer of Power हुआ था, जिसे भारत के स्वतंत्र हो जाने का भ्रम पैदा किया गया। बहुत से लोगों को Independence और Transfer of Power के बीच का अंतर नहीं पता होगा, तो जान लीजिये जैसे आपने आम चुनाव में देखा होगा कि जब कोई दल चुनाव जीत जाता है तो उसके नेता को प्रधानमंत्री चुन लिया जाता है और वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है। जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है। ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट (Transfer of Power Agreement) के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और पाकिस्तान नामक दो Dominion States बनाये गए हैं। हिंदी में Dominion State का अर्थ होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, इस शब्द अर्थ अखंड भारत के सन्दर्भ में लिया जाता है। अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है “One of the self-governing nations in the British Commonwealth” और दूसरा “Dominance or power through legal authority “
Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है। इसका सीधा मतलब ये है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं। सत्ता के लालच में बिना सोचे समझे ये सब स्वीकार कर लिया गया और ये जो तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून Indian Independence Act 1947 यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून, 1947 अंग्रेजों के संसद में बनाया गया, इस की प्रति आप इस लिंक से भी पढ़ सकते हैं।
Click to access ukpga_19470030_en.pdf
भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना के आधार पर निर्मित Indian Independence Act 1947 के आधार पर किया गया। NIC की वेबसाइट से इस लिंक को ही मिटा दिया गया है- http://egazette.nic.in/WriteReadData/1947/E-2372-1947-0000-110376.pdf इस अधिनियम में कहा गया कि 15 अगस्त 1947 को भारत व पाकिस्तान अधिराज्य (यहाँ ब्रिटिश हुकूमत को एक बड़े राज्य के अधीन राज्यों को अधिराज्य से तात्पर्य है ) नामक दो स्वायत्त्योपनिवेश बना दिए जाएंगें और उनको ब्रिटिश सरकार सत्ता सौंप देगी। स्वतंत्रता के साथ ही 14 अगस्त को पाकिस्तान अधिराज्य (बाद में जम्हूरिया ए पाकिस्तान) और 15 अगस्त को भारतीय संघ (बाद में भारत गणराज्य) की संस्थापना की गई। इस घटनाक्रम में मुख्यतः ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रांत को पूर्वी पाकिस्तान और भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में बाँट दिया गया और इसी तरह ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत को पश्चिमी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और भारत के पंजाब राज्य में बाँट दिया गया। इसी दौरान ब्रिटिश भारत में से सीलोन (अब श्रीलंका) और बर्मा (अब म्यांमार) को भी अलग किया गया लेकिन इसे भारत के विभाजन में नहीं शामिल किया जाता है। इसी तरह 1971 में पाकिस्तान के विभाजन और बांग्लादेश की स्थापना को भी इस घटनाक्रम में नहीं गिना जाता है। (नेपाल और भूटान इस दौरान भी स्वतंत्र राज्य थे और इस बंटवारे से प्रभावित नहीं हुए।) मजे की बात ये है कि जिन महात्मा गाँधी को देश की आज़ादी का मसीहा बताया जाता रहा है वे ही इस तथाकथित आज़ादी के खिलाफ थे, गाँधी जी इस संधि से बिलकुल भी सहमत नहीं थे, इसी कारण 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं, नोआखाली में थे।
ब्रिटिश-भारतिय नौसेना का विद्रोह और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन में आई आर्थिक-मंदी ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी। 1947 में ब्रिटेन की संसद में भारतिय स्वतंत्रता अधीनियम के पारित होने के बाद, ब्रिटिश सरकार ने भारत पर अधिपत्यता त्याग दी। इसके बाद, ब्रिटिश कानूनन् प्रक्रिया के तहत भारत को ब्रिटिश-उपनिवेश से ब्रिटिश-स्वायत्तयोपनिवेश(डोमीनियन) का दरजा दे दिया गया। जिसके बाद, कानून तौर पर भारत एक स्वायत्तय एवं स्वतंत्र राष्ट्र बन गया एवं प्रक्रिया-स्वरूप भारत, ब्रिटिश-राष्ट्रमंडल प्रदेश का हिस्सा बन गया और अन्य राष्ट्रमंडल प्रदेशों की तरह ब्रिटेन के राजा, जौर्ज षष्ठम को भारत का राष्ट्राध्यक्ष बना दिया गया। (आप इसका उदाहरण से ऐसे भी समझ सकते हैं कि ब्रिटेन की महारानी को भारत के साथ साथ 71 राष्ट्रमंडल देशों भी अपना नागरिक मानते हैं इसलिए उनको किसी VISA या पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती जबकि हमारे देश से इंग्लैंड जाने पर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति का VISA लगता है।) भारत में उनका प्रतिनिधित्व भारत के महाराज्यपाल (गवर्नर-जनरल) द्वारा होता था, जिन्हें “भारत के राजा” का सारा कार्याधिकार हासिल था। 1950 में संविधान को संविधानसभा की स्वीकृती मिल गई और 26 जनवरी 1950 को संविधान के परवर्तन के साथ ही भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बन गया और आधिराजकिय व्यवस्था को संविधान द्वारा गणराजकिय व्यवस्था से बदल दिया गया। भारत के राजा व महाराज्यप्ल के पद को समाप्त कर दिया गया एवं लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए भारत के महामहिंम राष्ट्रपति को राष्ट्राध्यक्ष बना दिया गया।
ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार नए अधिराज्यों में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा, इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था- Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC चलता है और Ireland में जहाँ “I” का मतलब Irish है वही भारत के IPC में “I” का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest Act, Indian Agricultural Price Commission Act सब के सब आज भी बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए वैसे ही चल रहे हैं। इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन – देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे चाहे वो शहर का नाम हो या सड़क का नाम।
अधिराजकीय राजतंत्रिक व्यवस्था में सारे स्वायत्त्योपनिवेशों (या अधिराज्य) का केवल एक ही नरेश एवं एक ही राजघराना होता है, अर्थात सारे अधिराज्यों पर एक ही व्यक्ति (सम्राट, नरेश राजा या शासक) का राज होता है। यह नरेश, हर एक अधिराज्य पर सामान्य अधिकार रखता है एवं हर अधिराज्य में संवैधानिक व कानूनन रूप से उसे राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा प्राप्त होता है। यह होने के बावजूद सारे अधिराज्य स्वतंत्र एवं तथ्यस्वरूप स्वतंत्र रहते हैं क्योंकि हर देश में अपनी खुद की स्वतंत्र सरकार होती है और नरेश का पद केवल परंपरागत एवं कथास्वरूप का होता है। शासक का संपूर्ण कार्यभार एवं कार्याधिकार उस देश के महाराज्यपाल के नियंत्रण मे रहता है जिसे तथ्यस्वरूप सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। इस तरह की व्यवस्था सार्थक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य व ब्रिटिश-राष्ट्रमंडल प्रदेशों(ब्रिटेन, कैनडा, ऑस्ट्रेलिया, अदि) व पूर्व ब्रिटिश अधिराज्यों की शासन प्रणाली में देखी जा सकती है। भारत में इस क्षणिक स्वयत्योपनिवेशिय काल में इसी तरह की शासन प्रणाली रही थी। इस बीच भारत में विधानपालिकी का पूरा कार्यभार संविधानसभा पर था व कार्यपालिका का मुखिया भारत के प्रधानमंत्री थे। इस बीच भारत पर केवल एक; राजा जाॅर्ज (षष्ठम) 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक का राज रहा, एवं दो महारज्यपालों महामहिम महाराज्यपाल, विस्कांट, बर्मा के लाॅर्ड माउंटबैटन (15 अगस्त 1947 से 21 जून 1948 तक)और महामहिंम महाराज्यपाल श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (21 जून 1948से 26 जनवरी 1950तक) व एक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू(15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक)की नियुक्ती हुई।