Your cleverness will not work, only the IP address and mobile number will know your real-time location.
#Technology #RealTimeLocation #IANA
सिर्फ IP एड्रेस और मोबाइल नंबर से ही आपकी रियल टाइम लोकेशन ट्रेस की जा सकती है. जब मोबाइल फोन खरीदते है और ID प्रूफ देते हैं तो भी एक नंबर दिया जाता है. ये नंबर इसलिए मिलता है ताकि अगर कोई मोबाइल फोन या उस नंबर से कोई गलत काम करता है तो उसका एड्रेस मिल जाए और उस तक पहुंचा जा सके.
इसी तरह जब आप इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं तो उस वक्त आपको एक IP (internet Protocol Address) एड्रेस दे दिया जाता है. फिर आप जब-जब जो भी वेबसाइट एक्सेस करते हैं या उस पर जाते हैं तो हर वेबसाइट के पास जानकारी पहुंच जाती है की आप कौन है, किस ब्राउज़र से हैं, कौन सा फोन इस्तेमाल कर रहे हैं, यहां तक कि उनको ये भी पता चल जाता है कि यूजर का IP एड्रेस क्या है.
नेटवर्क में जितने भी कंप्यूटर संयुक्त या connected हैं इनके बीच में जो भी संचार होता है वो IP एड्रेस के जरिये ही होता है. ये एड्रेस, इंटरनेट कनेक्शन देने वाली कंपनियों अर्थात ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर भी कहते हैं) से मिलता है. मान लीजिए आपका जियो, एयरटेल, वोडाफोन या कोई भी कनेक्शन है तो ये लोग आपको एक IP एड्रेस देते है. ये IP एड्रेस इन कंपनियों को IANA ( Internet Assigned Number Authority)एजेंसी द्वारा प्रदान किया जाता है. IANAपूरी दुनियां में सबको IP एड्रेस प्रदान करती है. ये ही सब देखती है कि किसको कौनसा IP एड्रेस दिया जाए.
REGISTRY | AREA COVERED |
---|---|
AFRINIC | Africa Region |
APNIC | Asia/Pacific Region |
ARIN | Canada, USA, and some Caribbean Islands |
LACNIC | Latin America and some Caribbean Islands |
RIPE NCC | Europe, the Middle East, and Central Asia |
अगर IANA के वेब पेज पर जाएंगे तो आपको Number Resources में IP Addresses and AS Numbers दिखेगा. इस पर आप क्लिक करेंगे तो आप देखेंगे की इसने पूरी दुनिया को क्षेत्रों के हिसाब से बांटा हुआ है जैसे एशिया, अफ्रीका, यूरोप इत्यादि. भारत एशिया में आता है तो IANA ने APNIC (Regional Internet Registry administering IP addresses for the Asia Pacific)करके बनाया हुआ है. यानी जितनी भी इंटरनेट देने वाली कंपनियां भारत में हैं चाहे जियो, वोडाफोन, एयरटेल, आईडिया इत्यादि को IP एड्रेस ये ही प्रदान करती है.
अब मान लीजिये इन कंपनियों को बंच में एक करोड़ IP मिल गई हैं तो ये कंपनियां IP को अलग-अलग लोगों में वितरित करेगी. IANA की मदद से पता लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति कहां रहता है, किस देश में रहता है, सिटी कौनसी है परन्तु आसानी से उसके रियल टाइम का पता नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि IP तो किसी भी यूज़र को मिल जाती है.
ISP अपने लेवल पर डाटा को मेन्टेन करती है कि इस डेट पर, इस टाइम पर कोई यूजर ने इंटरनेट इस्तेमाल किया था इत्यादि. ISP इन सब डाटा को प्राइवेट रखती है. इसी प्रकार मोबाइल फोन से इंटरनेट इस्तेमाल करने पर उसके IP एड्रेस की मदद से जरुरत पढ़ने पर व्यक्ति के रियल टाइम लोकेशन के बारे में पता लगाया जा सकता है.